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कन्नुले धुतुदे

This is a composition by the famous 15th century bhakti saint Annamacharya, rendered so well by M S. Subbulakshmi. For anyone else (like me) who doesn’t know Telugu I have it in Sanskrit:

कन्नुले  धुतुदे  घन  वैकुन्दम्
वेन्नुनि  गोलिचिन  विज्ञानिकि ।।

तलचिनदेल्ला  तत्वरहसमे
तेलिसिन  योगिकि  धिन  धिनमु ।
पलिकिनदेल्ला  परम  मन्त्रमुले
फलियिन्चिन  हरि  भक्तुनिकि ।।

पत्तिनदेल्ला  भ्रह्मात्मकमे
पुत्तुनु  गेलिच्न  पुन्युनिकि ।
मेत्तिन  देल्ला  मिन्नेति  निधुले
रत्तदि  तेगुव  मेरयु  वानिकि ।।

विनिनवि  एल्ल  वेदान्तमुले
घनुदगु  (सरन्ना)  गतुनिकि ।     ??
एनसिन  श्रि वेन्कतेसुदे  इन्त
कोनकेक्किन  निज  कोविदुनिकि ।।

Update – found M S. Subbulakshmi’s rendering of it on YouTube:

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